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    सिंधी मतदाताओं को लुभाने का नगरसेविका कांचन लुंड का प्रयास असफल ; लुंड के प्रस्ताव पिछे लेने के बाद शिवसेनेना के दो नगरसेवक मुंह के बल गिरे!

    Ulhasnagar (Badlapur Vikas Media) - In the area of ​​Ulhasnagar Municipality, for the past week, a dispute has arisen between the Marathi and Sindhi-speaking people due to the demise of a corporation corporation. The name of this corporation is Smt. Kanchan Amar Lund is the Chairman of the Standing Committee of the Municipality and Ulhasnagar Municipal Corporation. He had recently made a very controversial proposal in the Ulhasnagar municipal administration. That is No. 12 of the proposal.  Kanchan Lund had proposed that the name of Ulhasnagar should be changed to Sindhunagar. After their proposal, they started getting severe criticism from the entire Ulhasnagar city. Significantly, the proposal was supported by two Marathi councilors, who approved the proposal. The citizens of Ulhasnagar city were also very angry with these two corporators including Kanchan Lund.  Instead of following up with the administration, thinking of solving many problems in Ulhasnagar city, a proposal was made to rename the city to Sindhunagar.  As some in the Sindhi community supported the proposal to name the city as Sindhunagar, the debate started that all Marathi and other linguistic voters should not even consider changing the name of Ulhasnagar. In this case, the wise citizens of Sindhunagar Kai and Ulhasnagar, or politicians, were arguing that the politicians were trying to burn their royal fire by stirring up controversy among themselves and creating controversy. After all, it was clear to all citizens of Ulhasnagar city why Sindhunagar proposal was presented in the face of the election. Citizens express anger over Kanchan Lund At the same time the citizens also expressed their displeasure over the two Mahasabha councilors who, while being Marathi-speaking, were supporting the change of the name Ulhasnagar as the name of Sindhunagar.  Upon realizing that the citizens of Ulhasnagar city have recognized their left, Chairman and Corporator Kanchan Lund has withdrew his proposal, and has submitted a written application to the Ulhasnagar Municipal Commissioner. Photos of the same information and statement have also been posted on social media by Kanchan Lund. As part of the joke, now that Kanchan Lund has withdrawn his proposal, the two corporators have come face to face.  The way citizens react to these two councilors will be published in the next issue.
    उल्हासनगर (महाराष्ट्र विकास मिडिया)- उल्हासनगर में पिछले कुछ दिनों से उल्हासनगर शहर का नाम बदलकर सिंधूनगर रखने की जोरों से चर्चा थी। उल्हासनगर महापालिका की नगरसेविका एवं स्थायी समिती सभापती श्रीमती. कांचन अमर लुंड इन्होंने उल्हासनगर नाम बदलकर सिंधूनगर रखने का प्रस्ताव रखने के बाद उल्हासनगर-सिंधूनगर की चर्चा शुरु हुई। आखिरकार उल्हासनगर के रहिवासीयों का क्रोध देख और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अपने आक्रमक भुमिका में आते देख नगरसेविका लुंड ने अपना प्रस्ताव वापस लिया। प्रस्ताव वापस लेने का निवेदन सोशल मिडिया में जोरदार व्हायरल हो रहा है।
    बता दें कि, सिंधी सामुदाय की नगरसेविका कांचन लुंड द्वारा सिंधी समाज के मतादाताओं को लुभाने के हेतुसे साथ ही आनेवाले विधानसभा चुनाव में अपनी प्रेस्टिज बढाने के चक्कर में कांचन लुंड ने सिंधूनगर नाम रखने का मुद्दा उठाया। गौरतलब हो कि, इस प्रस्ताव को शिवसेना के दो नगरसेवकोंने भी अनुमोदक और सुचक के तौर पर सपोर्ट किया।
    उल्हासनगर शहर में पिछले कई वर्षों से समस्याओं की बाढ है। इन समस्याओं को सुलझाने में उल्हासनगर महापालिका प्रशासन और लोकप्रतिनिधी पुरीतरह नाकाम साबित हुए है। ऐसे में समाजसेवा और विकास कार्य करने के बजाय शहर का नाम बदलले में इन तीनों नगरसेवकों को क्यों इतनी दिलचस्पी थी इस बात का अब खुलासा शहर में हो रहा है।
    आनेवाले चुनाव में अपना प्रेस्टिज बढाने के चक्कर में जिसप्रकार सिंधी और मराठी भाषा के मतदाताओं के बिज में तनाव पैदा कर फुट डालने का काम अप्रत्यक्ष रुप से नगरसेविका कांचन लुंड साथ ही उनके प्रस्ताव को सपोर्ट करनेवाले दो नगरसेवकों ने किया है उसे देख उल्हासनगर में अपनी राजनैतिक दुकान चलाने के लिए कुछ लोकप्रतिनिधी कितने हद तक गिर सकते है यह उल्हासनगर शहरवासीयों को देखने को मिला।
    इन तीनों नगरसेवकों द्वारा जिसप्रकार शहर का नाम बदलकर एक विशेष सामुदाय के लोगों को लुभाने का प्रयास पिछले कुछ दिनों से चल रहा था आखिरकार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और जागृक नागरिकों के वजय से असफल साबित हुआ है।
    शहर का नाम बदलने के पिछे राजनैतिक नेताओं का स्वार्थ होने की बाद उल्हासनगर शहरवासीयों को बता चलने के बाद सभी जगहों से नगरसेविका कांचन लुंड पर टिका टिप्पनी होने लगा। साथ ही मराठी भाषा के मतदाताओं ने भी घर का भेदी कहलाये जानेवाले उन दो शिवसेना नगरसेवकों पर नाराजी जताई। शहर के नागरिकों को जोरदार विरोध देख आखिरकार कांचन लुंड ने शहर के नाम को बदलने का प्रस्ताव वापस लिया। नगरसेविका एवं स्थायी समिती सभापती लुंड ने महापौर को लिखित तौर पर प्रस्ताव वापस लेने की जानकारी दी।
    मजे की बात यह है कि, कांचन लुंड के प्रस्ताव को देख सिंधी मतदाताओं में लोकप्रिय होने की चाह रखते हुए जिन शिवसेना के दो नगरसेवकों ने बेगानी शादी में अब्दुल्ला दिवाना की तरह अनुमोदक और सुचक के रुप में सपोर्ट दर्शाया वे दोनो आज मुह की बल गिरे होने की शहर में चर्चा है।

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