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    लोकप्रतिनिधी अगर गलत करता है तो उसपर टिका टिप्पणी होती है यह बात को समझ ले भाजपा पदाधिकारी महेश सुखरामानी

    ULHASNAGAR (Maharashtra Development Media) - Recently, BJP official Mahesh Sukhramani appeared in a video while drinking alcohol, after which the media and social media commented strongly on this act of the BJP. Let me tell you that during a function of Rotary Club of Ulhasnagar, a permit bar with a bottle of liquor in hand, BJP official Mahesh Sukhramani and other BJP leaders and working as a social worker in the city while drunkenly drinking, and taking a kiss Be seen The people of Ulhasnagar came to know about this after a person who had jammed in the same program shot the entire video and posted it on social media. In the social media, the video of Sukhramani and other BJP's whistle became so viral that the media also discussed the subject with great gusto. It may be noted that, due to the recent torrential rains in Ulhasnagar, people suffered a lot due to flood water in the houses of the people in the city and rural areas. In many rural areas of Ulhasnagar taluka, people were rescued to a safe place to save their lives. In such a difficult situation, if the BJP office bearers will bow in a bottle of wine, sing songs and dance at the same time, then how will the people of Ulhasnagar sit silent after seeing all this. People struggling with floods are upset, they have no ask. The government is also making them a master. In such a situation, it is natural for the general public to feel angry. In such a situation, commenting on the mentality of Mahesh Sukhramani and other BJP workers is bound to be commented upon. But Mahesh Sukhramani may not understand this, so he is now sending such a message in social media through his activists that, Mahesh Sukhramani has no personal life which is being targeted to him. Is it a crime to put a wine picker on a whim, as if Mahesh Sukhramani was trying to tell in a message that it is very bad. Why does Mahesh Sukhramani and other BJP people forget that he is a social worker, a social worker, a public representative, not a slum of any Galli, whatever citizens should not pay attention to. Mahesh Sukharamani, if the members of the political party and the public representative did not live, then they would take a bottle in their hands, or they would not ask anything in the mouth of Mogli's bag, by wearing the tights of Mowgli, and the general public would have nothing to do but if Sukhramani would be a public representative If you do something like that, if you do any act without taking cognizance of the society, then it is up to you to make headlines. It is a simple matter that people have high hopes from the public representatives and when the public representatives do something wrong, then the general public of Ulhasnagar, who is hopeful, will keep commenting. Media will also make such acts headlines. Now Mahesh Sukharamani should make himself self-conscious that with the glass of wine in his hand, he will bow during the flood situation and he has done it right or wrong by putting a kiss.
    उल्हासनगर (महाराष्ट्र विकास मिडिया)- हालही में भाजपा पदाधिकारी महेश सुखरामानी शराब के नशे में ठुमके लगाते हुए एक व्हिडीओ में दिखे जिसके बाद मिडिया एवं सोशल मिडियावर भाजपा के इस करतुत पर जोरदार टिका टिप्पणी की गई।
    बता दें कि, रोटरी क्लब ऑफ उल्हासनगर के एक कार्यक्रम दौरात एक परमिट बार में हाथ में शराब की बोतल लिए भाजपा पदाधिकारी महेश सुखरामानी एवं अन्य भाजपा नेतागण एवं शहर में समाजसेवा के रुप में काम करनेवाले शराब की नशे में झुमते हुए, और ठुमके लगाते हुए दिखे। उसी कार्यक्रम में जाम का मझा लेनेवाले एक ने पुरा व्हिडीओ शुट कर सोशल मिडिया में पोस्ट करने के बाद उल्हासनगर की जनता को यह बात मालुम हुआ। सोशल मिडिया में सुखरामानी एवं अन्य भाजपाई के ठुमके का व्हिडीओ इतना व्हायरल हुआ कि मिडिया ने भी इस विषय को बडी गंभिरता से समचार बनाया।
    गौरतलब हो कि, हालही में उल्हासनगर में मुसलाधार वर्षा के कारण शहर एवं ग्रामिण क्षेत्रों में लोगों के घरों में बाढ का पानी आने से लोगों का काफी नुकसान हुआ। उल्हासनगर तालुका के कई ग्रामिण इलाकों में तो लोगों को अपने जान माल को बचाने के लिए सुरक्षित स्थल पर रेस्क्यु तक किया गया। ऐसे सिचुएशन में दुखभरे मौसम में भाजपा पदाधिकारी नगरसेवक अगर उसी दौरान शराब की बोतल हात में रखे झुमेंगे, गाने गाएंगे और ठुमके लगाएंगे तो उल्हासनगर की जनता यह सब देखकर चुप कैसे बैठेगी। बाढ से झुझ रहे लोग परेशान है, उन्हे कोई पुछ नहीं रहा। सरकार भी उनका मझाक बना रही है। ऐसे में ऐसा व्हिडीओ देख आम जनता को क्रोध आना स्वाभाविक है। ऐसे में महेश सुखरामानी और अन्य भाजपाईयों के मानसिकता पर प्रश्न चिन्ह उपस्थित करते हुए उनपर टिप्पा टिप्पणी होने लाझमी है। लेकिन यह बात महेश सुखरामानी के समझ में शायद नहीं आ रही है इसलिए वे अपने कार्यकर्ताओं के जरिए अब सोशल मिडिया में ऐसा संदेश दे रहे है कि, क्या महेश सुखरामानी की कोई निजी जिंदगी नहीं है जो उन्हे टार्गेट किया जा रहा है। क्या शराब पिकर ठुमके लगाना अपराध है ऐसा भी संदेश में पुछकर मानो महेश सुखरामानी तो बडे ही दुध के धुले है यह बताने की पुरी कोशिश की गई।
    महेश सुखरामानी एवं अन्य भाजपाई क्यों भुल जाते है कि वे एक सोशल वर्कर है, समाजसेवक है लोकप्रतिनिधी है किसी गल्ली के टपोरी नहीं जो कुछ भी करें नागरिक ध्यान नहीं देने। महेश सुखरामानी अगर राजनैतिक पार्टी के सदस्य एवं लोकप्रतिनिधी नहीं रहते आम जनता रहते तो वे हाथ में बोतल लेकर ठुमके लगाए या फिर मोगली की चड्डी पेहेलकर उल्हासनगर झुंमे कोई कुछ नहीं पुछेगा और आम जनता को भी कुछ लेना देना नहीं होगा लेकिन अगर सुखरामानी एक लोकप्रतिनिधी के हैसियत से ऐसा कुछ करेंगे, समाज का भान न रखते हुए कोई कृत्य करेंगे तो उनकी सुर्खिया बनना तैय है।
    सीधीसी बात है लोकप्रतिनिधी से लोगों को काफी आशाएं हैं और जब लोकप्रतिनिधी कुछ गलत करता है तब वहीं आशा रखनेवाली उल्हासनगर की आम जनता टिका टिप्पनी करते रहेंगे। मिडिया भी ऐसे कृत्यों को सुर्खिया बनाएंगे। अब महेश सुखरामानी को खुद आत्मचिंतन करना चाहिए की हाथ में शराब का ग्लास लेकर बाढ परिस्थिती के वक्त झुमेंगे और ठुमके लगाकर उन्होंने सही किया या गलत।

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