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    नाबालिक लडकी को अगवा कर उसकी हत्या करनेवाले अपराधियों की फांसी और आजीवन कारावास की सजा हाईकोर्ट ने किया खारिज

    मुंबई (महाराष्ट्र विकास मिडिया)- मुंबई में 2012 में एक नाबालिक लडकी पर अत्याचार और उसकी हत्या करने का मामला प्रकाश में आया था। उस घटना के एक अपराधी को फांसी तो दुसरे अपराधी को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। लेकिन मुंबई हाईकोर्ट ने दोनो अपराधीयों की सजा को खारिज की है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट में दोनो अपराधीयों को बुधवार को केस से बाइज्जत बरी भी किया है।
    सिर्फ मोबाईल का सिडीआर और आयएमईआय के सबुतों को मद्देनजर रखते हुए गुन्हेगार समझना सही नहीं है, साथ ही किसी भी व्यक्ति ने घटना को उसवक्त नहीं देखने के कोई भी साक्षिदार नहीं मिला जिसके चलते सरकारी पक्ष के पास अपराधी के लिए पुखता सबुन ना होने के कारण आखिरकार हाईकोर्ट ने अपराधियों की सजा खारिज की ऐसा केस में देखने को मिल रहा है।
    वर्ष 2018 में मुंबई सत्र न्यायालय ने इस मामले में फासी की सजा अपराधी इम्तियाज शेख और उसके साथिदार अन्सारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट के इस निर्णय को आवाहन देतेहुए दोनो अपराधीयों ने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायमुर्ती भूषणधमार्धिकारी और न्यायमुर्ती स्वप्ना जोशी के खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की है। अपराधीयों की तफर से अॅड. फरहाना शाह ने दलीले पेश की।
    क्या था मामला?
    धारावी के व्यवसायिक राजेश भांगडे ने काम पर से निकालने से क्रोध में आकर अपराधीयों ने मालिक के पांचवी कक्षा में पढनेवाली लडकी को अगवाह कर उसकी निर्दयता से हत्या करने का आरोप अपराधियों पर लगा था। मालिक से बदला लेने के लिए इम्तियाज शेख और आझाद अन्सारी ने श्री नाम के नाबालिक लडगी को अगवाह किया। उसके बाद उसी दिन उनकी पेहचान ना हो इसलिए उस लडकी की बेदर्दी से हत्या की। श्री की डेडबॉडी भिवंडी के एक मॅनहोल में फेंक दिया था।
    उसके बाद राजेश को फोन कर फिरौती की मांग की गई। राजेश ने इस घटना की जानकारी पुलिस की मदद लेते हुए कॉल रेकॉर्डींग के सहाने अपराधीयों को कब्जे में लिया। इस मामले में कुल चार अपराधीयों को गिरफ्तार किया गया। राजेश को किये गये फोन कॉल्स के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाईल और सिमकार्ड फोन पुलिस ने अपराधीयों से बरामद किया।
    इस मामले में मुंबई सत्र न्यायालय ने 2018 में मुख्य अपराधी इम्तियाज शेख को फांसी की सजा दी और साथीदार आझाद अन्सारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन पुख्ता सबुन ना होने के कारण अब दोनों अपराधीयों को बाईज्जत बरी किया गया।

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