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    सत्ता और कुर्सी के लालची विधायक किसन कथोरे क्या इस बार तिकीट ना मिलने पर बी.जे.पी. को भी देंगे धोखा?

    Badlapur (Maharashtra Development Media) - The upcoming assembly elections are due on October 21. In this election, the present legislators of the Bharatiya Janata Party from the Murbad assembly are asking for election tickets once again, but two old and senior cadres of the same party are also thinking about giving tickets to those two loyal members this time. . Because of this, if the current legislator Kisan Kathore will not be given a ticket this time, they will also take on the rebellion this time.  Interestingly, MLA Kisan Kathore began his politics with the Congress party. Until he got the power in that time, he raised the flag of the Congress and started walking around the party's name in Badlapur - Ambarnath. But there came a time when the Congress did not give him a ticket, then he left the Congress party and joined the Nationalist Party. After entering the NCP, Sharad Pawar, the party high command, made him from Sarpanch to several important posts and made him a MLA in Badlapur and Ambarnath. At that time, NCP had power in the center and in the state, so Kisan Kathore became an MLA by winning election easily. But the bad days of the Nationalist and Congress Party started in the 2014 elections and the Modi wave started in the Bharatiya Janata Party. In such a case, the leaders who gave the status of MLA to the MLA will never revolt. Such senior NCP officials had hope but say that they do not see anything before the hunger of power in the same way. Kisan Kathore joined the Bharatiya Janata Party. One of the interesting things about this party entry is that at that time, NCP MLA Kisan Kathore himself left the party and brought hundreds of nationalist loyal workers along with him to the Bharatiya Janata Party. Thus, since the last 20-25 years, the loyal Bharatiya Janata Party (BJP) loyal to the one who worked for the party, was angry with bloodshed. It was a period of Bharatiya Janata Party Badlapur city and Murbad city when Kisan Kathore was in the nationalist. Calling the party a party of scammers, Kathore did not get involved in the nationalist tenure. He came to the BJP in the Modi wave of 2014 and started singing the song of the party. Badalpur and Murbad at that time, hardline loyal office-bearers of BJP had sought the election ticket of the assembly, but on this occasion, Kisan Kathore entered the party and got his candidacy. At that time, loyal workers were very angry but RSS And with the BJP being sacrificed, he strongly campaigned for Kisan Kathore by not insulting the visiting guests. To win the BJP candidate Kisan Kathore in the election, the BJP party won in the Murbad assembly by a single majority with a single tax majority.  Now, the current legislator Kisan Kathore, who has come to power once again in the 2019 assembly elections, is seeking a ticket from the party but this time the whole picture is different in BJP party of Badlapur and Murbad. BJP office-bearers have raised the question as to how long the party will claim the loyalty of the loyalists and the old cadres, now protesting strongly on giving tickets to Kisan Kathore. He is keen on the two loyal candidates of BJP Nandakishor Rambhau Patkar and Sharad Mhatre as candidates and they have issued wholehearted efforts to get tickets in the party. In this case, the current legislator, Kisan Kathore, who is now accustomed to power, is getting strongly debated in the political corridor.  Kisan Kathore, who rebelled with both the Congress and the Nationalist parties to stay in power and in the fame, cheated the party by not getting a single ticket, did he cheat the party likewise? Some BJP officials are skeptical. Where did the Bharatiya Janata Party give a ticket to Kisan Kathore who entered the party yesterday in 2014, did the party do good to him? Many such questions are now being raised.  According to secret sources, there was a turning point after the victory in the 2014 election as a legislator when he was not seen in the state government getting any red light (cabinet), when he was angry with the party in his constituency. He founded the Kisan Kathore Mitra Mandal. At that time, they were showing more interest in raising Kisan Kathore Mitra Mandal instead of raising the BJP party. This is the same circle in which more than 90 percent of the nationalists leave the party and enter the BJP party and perform social services in the name of this division in Murbad and Badlapur. What was the motive of Kisan Kathore, the motive behind raising more than one party in the Murbad assembly constituency, even today some leaders of the Bharatiya Janata Party's high command try to learn from the loyal workers. Did Kisan Kathore recognize at that time that the party will refuse to give him a ticket in the coming election, then Kisan Kathore Mitra Mandal will have to contest the independent election by making his choice? Such a question is still being asked by BJP loyal workers of the Murbad assembly. The intention of making Kisan Kathore Mitra Mandal is still not understood by the loyal and old workers of the BJP.
    बदलापूर (महाराष्ट्र विकास मिडिया)- आगामी विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को होनेवाला है। इस चुनाव में मुरबाड विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान विधायक फिर एक बार चुनाव तिकीट मांग रहे है लेकिन उसी पार्टी के दो पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ता भी तिकीट मांगने से इस बार पार्टी हायकमांड उन दो निष्ठावान सदस्यों को तिकीट देने के बारे में सोच रही है। जिसके चलते इस बार वर्तमान विधायक किसन कथोरे को अगर तिकीट नहीं दिया जाएगा तो इस बार भी वे बगावत पर उतरेंगे ऐसी शहर में चर्चा है।

    गौरतलब हो कि, विधायक किसन कथोरे ने अपनी राजनिती की शुरुवात कांग्रेस पार्टी से की थी। उस वक्त उन्हे सत्ता में पद मिलने तक वे कांग्रेस का झेंडा उठाकर बदलापूर - अंबरनाथ में पार्टी के नाम से घूमने लगे लेकिन एक दौर आया जब कांग्रेस के उन्हे तिकीट नहीं दिया उस वक्त वे कांग्रेस पार्टी को छोड कर राष्ट्रवादी पार्टी में दाखिल हुए। राष्ट्रवादी पार्टी में प्रवेश करने के बाद पार्टी हायकमांड शरद पवार ने उन्हे सरपंच से लेकर कई महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान कर उन्हे बदलापूर और अंबरनाथ में विधायक तक बना दिया। उस वक्त राष्ट्रवादी की केंद्र और राज्य में सत्ता थी इसलिए किसन कथोरे राष्ट्रवादी से बडे ही आसानी से चुनाव जितकर विधायक बने थे। लेकिन 2014 के चुनाव में राष्ट्रवादी और कांग्रेस पार्टी के बुरे दिन शुरु हुए और भारतीय जनता पार्टी में मोदी लहर की शुरुआत हुई। ऐसे में राष्ट्रवादी पार्टी ने जिन नेताओं को विधायक तक का दर्जा दिलाया वे कभी बगावत नही करेंगे ऐसी राष्ट्रवादी वरिष्ठ पदाधिकारीयों को आशा थी लेकिन कहते है ना सत्ता के भुक के आगे कुछ नहीं दिखता ठिक उसी तरह से निष्ठावान का कंबल लिपटकर राष्ट्रवादी को नमस्ते कहते हुए किसन कथोरे भारतीय जनता पार्टी में दाखिल हुए। इस पार्टी प्रवेश में एक मजे की बात तो यह है कि, उस वक्त के राष्ट्रवादी के विधायक किसन कथोरे खुद तो पार्टी छोडकर गये ही साथ ही अपने साथ सैकडों राष्ट्रवादी निष्ठावान कार्यकर्ताओं को भी भारतीय जनता पार्टी में लेकर आए। ऐसे में पिछले 20-25 साल से भारतीय जनता पार्टी में खुन पसिना एक कर पार्टी का काम करनेवाले निष्ठावान भाजपाई बडे ही नाराज हो गये। यह भारतीय जनता पार्टी बदलापूर शहर और मुरबाड शहर का ऐसा दौर था जब किसन कथोरे राष्ट्रवादी में थे उस वक्त भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों को चोर चिटर, डरपोक तक कह दिया। पार्टी को घोटालेबाजों की पार्टी भी कहने से कथोरे राष्ट्रवादी कार्यकाल में नहीं कतराए वे 2014 के मोदी लहर में भाजपा में आकर पार्टी का गुनगान गाना शुरु किया। उस वक्त बदलापूर और मुरबाड से भाजपा के कट्टर निष्ठावान पदाधिकारीयों ने विधानसभा का चुनाव तिकीट मांगा था लेकिन ऐन मौके पर किसन कथोरे ने पार्टी में प्रवेश कर उम्मीदवारी हासिल की। उस वक्त निष्ठावान कार्यकर्ता बडे ही नाराज थे लेकिन आर.एस.एस. और भाजपा का संस्कार होने से उन्होंने आए हुए मेहमान की बेइजती ना करते हुए किसन कथोरे का जोरदार प्रचार किया। चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार किसन कथोरे को जीताने के लिए एडीचोटी एक कर बहुमत से मुरबाड विधानसभा में भाजपा पार्टी को जीत हासील हुई।


    अब 2019 के विधानसभा चुनाव में फिर एक बार सत्ता में रहने के आधिन हो चुके वर्तमान विधायक किसन कथोरे पार्टी से तिकीट मांग रहे है लेकिन इस बार बदलापूर और मुरबाड के भाजपा पार्टी में पुरी पिक्चर अलग है। पार्टी के निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ता अब किसन कथोरे को तिकीट देने पर जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए आखिर कब तक निष्ठावानों का हक मारेगी पार्टी ऐसा भाजपा पदाधिकारीयों ने सवाल उठाया है। वही भाजपा के दो निष्ठावान उम्मीदवार नंदकिशोर रामभाऊ पातकर और शरद म्हात्रे उम्मीदवार के रुप में इच्छुक है और उन्होंने पार्टी में तिकीट हासिल करने के लिए पुरी कोशिशे जारी की है। ऐसे में अब सत्ता के आदी हो चुकी वर्तमान विधायक किसन कथोरे कौनसा कदम उठाते है इसकी राजनैतिक गलियारे में जोरदार चर्चा हो रही है।


    किसन कथोरे जिन्होंने सत्ता में और फेम में रहने के लिए जहां कांग्रेस और राष्ट्रवादी दोनों पार्टीओं के साथ बगावत की, उन्हें एक प्रकार तिकीट ना मिलने से पार्टी को छोडकर पार्टी को धोखा दिया क्या उसी प्रकार अब वे भारतीय जनता पार्टी के साथ भी करेंगे ऐसी भी कुछ भाजपा पदाधिकारीयों को शंका हो रही है। भारतीय जनता पार्टी ने जहां आज कल में पार्टी में प्रवेश करनेवाले किसन कथोरे को 2014 में तिकीट देकर उनपर पार्टी ने उपकार किया था क्या कथोरे उस उपकार को भुल जाएंगे ? ऐसे कई सवाल अब पैदा हो रहे है।
    गुप्त सुत्रों के अनुसार 2014 के चुनाव में विधायक के रुप में जीत हासिल होने के बाद ऐसा भी मोड आया था जब राज्य सरकार में उन्हे लालबत्ती (मंत्रीपद) मिलने के कोई आसार नहीं दिख रहे थे उस वक्त वे अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी से नाराज़ होकर उन्होंने किसन कथोरे मित्र मंडल की स्थापना की थी। उस वक्त वे भाजपा पार्टी को बढाने के बजाय किसन कथोरे मित्र मंडल को बढाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे थे। यह वही मंडल है जिसमें 90 प्रतिशत से ज्यादा राष्ट्रवादी पार्टी को छोडकर भाजपा पार्टी में प्रवेश कर इस मंडल के नाम से मुरबाड और बदलापूर में समाजसेवा करते है। पार्टी से ज्यादा एक मंडल को मुरबाड विधानसभा क्षेत्र में बढाने के पिछे का किसन कथोरे का क्या मकसद था आज भी यह सवाल भारतीय जनता पार्टी के हायकमांड के कुछ नेता निष्ठावान कार्यकर्ताओं से जानने की कोशिश करते है। क्या उस वक्त ही किसन कथोरे पेहचान गये थे कि आनेवाले चुनाव में उन्हे पार्टी तिकीट देने से इनकार करते करेगी उसवक्त किसन कथोरे मित्र मंडल को अपनी निव बनाते हुए अपक्ष चुनाव लढना पडेगा ? ऐसा प्रश्न भी मुरबाड विधानसभा के भाजपा निष्ठावान कार्यकर्ता आज भी पुछ रहे है। किसन कथोरे मित्र मंडल को बनाने का मकसत आज भी भाजपा के निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं को समझ में नही आया है लेकिन इस मंडल के कार्यकर्ता वर्तमान विधायक किसन कथोरे ही फिर एक बार ऐसी सोशल मिडिया में घोषणा करते हुए मुरबाड में विकासाचे वारे सिर्फ और सिर्फ किसन कथोरे ऐसे नारे लगा रहे है। जिससे एक तो तय है कि किसन कथोरे मित्र मंडल पार्टी को नहीं बल्कि किसन कथोरे को मुरबाड विधानसभा जीताने के लिए उतावली है।


    हालही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुरबाड विधानसभा क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी के इच्छुक उम्मीदवार शरद म्हात्रे ने ऐसी स्टेटमेंट दी है कि, भारतीय जनता पार्टी के पास इस बार अवसर है इस चिज को देखने की कि, अगर पार्टी वर्तमान विधायक किसन कथोरे के बजाय दुसरे उम्मीदवार को तिकीट देती है तो क्या किसन कथोरे उक्त उम्मीदवार का प्रचार करते है और पार्टी को मजबुत बनाने में प्रयत्न करते है या फिर कांग्रेस और राष्ट्रवादी की तरह भारतीय जनता पार्टी को भी धोखा देते है। शरद म्हात्रे के इस स्टेटमेंट से एक तो तय है कि, अगर किसन कथोरे जिन्हे भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश करने के बात तुरंत तिकीट देकर पार्टी ने मोदी लहर में उन्हे विधायक बनाया आज वे पार्टी का आदेश मानेंगे या फिर सत्ता और कुर्सी की लालच में पार्टी के साथ ही गद्दारी करेंगे।
    अब वक्त ही बताएगा कि, वर्तमान विधायक किसन कथोरे इस बार पार्टी ने तिकीट ना देने पर पार्टी के आदेश का पालन करते हुए मुरबाड विधानसभा उम्मीदवार का प्रचार करेगी या पार्टी के साथ बगावत करेगी।

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