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    किड्नैपिंग केस को दबाने के लिए कितने में बिक गये बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के लक्ष्मण सारिपुत्र ?

    Badlapur (Maharashtra Development Media) - In Maharashtra, on the one hand the government is engaged in enacting new laws to protect journalists and on the other hand the local police administration is engaged in protecting the criminals who attack journalists and kidnapping journalists. Are getting.  A few months ago, a senior journalist from Badlapur city was called in broad daylight. In which the talk of the leaders of local political parties and their relatives is coming. Today is going to be the year after the statements of Pukta Sabut and Pidit, but so far the culprit who has led the journalist has failed to arrest the Badal West police.  Let the police administration keep this in mind when the daily Badlapur Vikas local newspaper started printing the news against corrupt policemen due to the bribery in the city against the corruption in Badlapur West Police Station, as well as the criminals of this kidnapping case Instead of apprehending him, this charge is helping him, Dr. Jagannath Va. Senior journalist of Badlapur. Kamat planted it.  Journalist Mahesh J. Kamat says that so far, Badlapur West Police Station has not taken any action against those leading the 64-year-old journalist. Here in Badlapur West Haddah, from day-to-day citizens to journalists are carried out. Instead of apprehending the criminals who are abducted, corrupt policemen of the local police administration are always trying to save them. This is clearly visible from this kidnapping case. Thane Police Commissioner, I.G. And despite giving complaint letters everywhere at the senior level, Badlapur West Local Police Administration is still not conducting a fair investigation in the kidnapping case. In such a situation, the Crime Department is now demanding to start an independent investigation.  Giving more information in this case, Mahesh J. Kamat, surveyor of Badlapur Development newspaper, told Maharashtra Vikas Media that, today, the public is disturbed by the dirty habit of working with the money of corrupt policemen of Badlapur West police station in Badlapur city. Due to which the name of police administration in Badlapur city is bad today. In Badlapur, people call the police an intruder because the intruder of Badlapur West police station is more interested in suppressing the case by taking money from the criminals who committed the crime than giving justice to Pidit. Today, by committing money in the investigation of the case by eating the money of these policemen, the criminals who commit the crime in Badlapur city today commit the crime and then take the help of these bribe policemen by heating them up. Even after committing the crime, they roam freely in the city and Pidit is threatened again. Does the Maharashtra Government Police Department not pay every month to these corrupt policemen of Badlapur West police station who lick the feet of political parties and their goons.  Significantly, in Badlapur city, terror has spread in the city due to leaders of some political parties, their workers and mercenaries for the last several months. Sometimes someone is beaten on the way, sometimes someone's car is burnt. The special thing is that instead of taking action against the criminals, the local police administration advises Pidit not to file a complaint after watching the Puri incident. In Badlapur West Police Station, this mess is going on with former Senior Police Inspector Jitendra Agarkar, who is now also taking Laxman Sariputra in the same direction.  Laxman Sariputra is serving as Senior Police Inspector of Badlapur West Police Station. In Badlapur West, when the said 64-year-old senior journalist was kidnapped, Laxman Sariputra Badlapur West Police Station's VP. Was in the post. Sariputra is still not getting criminals despite the incident happening so many months. Laxman Sariputra says that the police investigation process is on, but whether the police are having trouble arresting the criminals even after mentioning the name and name of the kidnapping. Is this any trick of Lakshman Sariputra (VP) to suppress this kidnapping case by pretending to be a police investigation process? Did Laxman Sariputra sell out at the hands of the kidnapping criminals? To suppress the case, by selling your Eman, how much has the V.P.P. Is Laxman Sariputra saving criminals? Many such questions are now asked in Badlapur city.
    बदलापूर (महाराष्ट्र विकास मिडिया)- महाराष्ट्र में एक तरफ सरकार पत्रकारों की रक्षा हेतु नये कानून बनाने में जुटी है और दुसरी ओर पत्रकारों पर हमला करनेवाले तथा पत्रकारों को किड्नैप करनेवाले अपराधियों को बचाने में स्थानिय पुलिस प्रशासन जुटी होनी बात बात बदलापूर शहर में देखने को मिल रहा है। 
    कुछ महिने पूर्व बदलापूर शहर के एक वरिष्ठ पत्रकार को दिनदहाडे अगवाह किया गया था। जिसमें स्थानिय राजनैतिक दलों के नेताओं और उनके सगे संबंधियों के होने की बात सामने आ रही है। पुक्ता सबुत और पिडीत के स्टेटमेंट के बाद आज साल होने को है लेकिन अब तक पत्रकार को अगवाह करनेवाले अपराधियों को बदलापूर पश्चिम पुलिस पकडने में नाकामयाब है।
    बता दें कि बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ साथ ही पुलिस द्वारा शहर में रिश्वतखोरी के चलते दैनिक बदलापूर विकास स्थानिय अखबार ने जब भ्रष्ट पुलिसवालों के खिलाफ खबर छापना शुरु किया उस बात को ध्यान में रख पुलिस प्रशासन इस किड्नैपिंग केस के अपराधियों को पकडने के बजाय उनकी मदद कर रही है ऐसा आरोप बदलापूर के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. जगन्नाथ वा. कामत ने लगाया।
    पत्रकार महेश ज. कामत का कहना है कि, बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने ने अब तक 64 साल के वरिष्ठ पत्रकार को अगवाह करनेवालों के खिलाफ किसी भी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की है। यहां बदलापूर पश्चिम हद्द में दिनदहाडे सामान्य नागरिकों से लेकर पत्रकारों तक को अगवाह किया जाता है। अगवाह करनेवाले अपराधियों को पकडने के बजाय उन्हे कैसे बचाया जाय इस ओर स्थानिय पुलिस प्रशासन के भ्रष्ट पुलिसकर्मी हमेशा कोशिश करते रहते है। यह इस कि़ड्नैपिंग केस से साफ दिखाई दे रहा है। ठाणे पुलिस कमिश्नर, आई.जी. एवं वरिष्ठ स्तर पर सभी जगह शिकायत पत्र देने के बावजुत बदलापूर पश्चिम स्थानिय पुलिस प्रशासन अब तक किड्नैपिंग केस में निष्पक्ष रुप से जांच नही कर रही है। ऐसे में इस केस को अब क्राईम डिपार्टमेंट ने इंडिपेंडेंट जांच शुरु करने की मांग अब हो रही है।
    इस केस में ज्यादा जानकारी देते हुए बदलापूर विकास अखबार के सर्वेसर्वा महेश ज. कामत ने महाराष्ट्र विकास मिडिया को बताया कि, आज बदलापूर शहर में बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के भ्रष्ट पुलिस वालों के पैसे खाकर काम करने की गंदी आदत से लोक परेशान है । जिससे आज बदलापूर शहर में पुलिस प्रशासन का नाम खराब है। बदलापूर में लोग पुलिस को घुसखोर कहते है क्योंकि बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के घुसखोर पुलिसकर्मी पिडीत को न्याय देने के बजाय जुर्म करनेवाले अपराधियों से पैसे लेकर केस को दबाने में ज्यादा रुची रखती है। इन पुलिस वालों के पैसे खाकर केस की जांच में हेराफेरी करने से आज बदलापूर शहर में क्राईम करनेवाले बेझिझक जुर्म को अंजाम देते है और उसके बाद इन्ही रिश्वतखोर पुलिस कर्मीयों के हात गरम कर उनकी मदत लेते है। अपराध करने के बाद भी शहर में खुलेआम घुमते है और पिडीत को फिर डराया धमकाया जाता है। बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के इन भ्रष्ट पुलिसकर्मीयों को क्या महाराष्ट्र शासन पुलिस विभाग हर महिने तन्ख्वा नहीं देती जो राजनैतिक दलों के नेताओं और उसके गुंडों के पैर चाटकर उनकी चमचागिरी करते रहते है।
    गौरतलब हो कि, बदलापूर शहर में पिछले कई महिनों से कुछ राजनैतिक दलों के नेताओं, उनके कार्यकर्ताओं और भाडे के टट्टूओं के कारण शहर में आतंक फैला है। कभी रास्ते पर किसीको पिटा जाता है तो कभी किसी की गाडी जलाई जाती है। विशेष बात तो यह है कि, स्थानिय पुलिस प्रशासन अपराधियों के खिलाफ कारवाई करने के बजाय पुरी घटना देख पिडीत को ही शिकायत दर्ज ना करने की सलाह देते है। बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने में यह गंदगी पुर्व वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जितेंद्र आगरकर से चलते आ रही है जो की अब लक्ष्मण सारिपुत्र भी उसी दिशा में ले  जा रहे है ऐसी शहर में चर्चा है।
    लक्ष्मण सारिपुत्र बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक पद पर कार्यरत है। बदलापूर पश्चिम में जब उक्त 64 साल के वरिष्ठ पत्रकार को किड्नैप किया गया उस वक्त लक्ष्मण सारिपुत्र बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के व.पो.नि. पद पर थे। घटना को आज इतने महिने होने के बावजुद सारिपुत्र को अब तक अपराधि मिल नही रहे। लक्ष्मण सारिपुत्र कहते है कि, पुलिस जांच प्रक्रिया शुरु है लेकिन क्या किड्नैपिंग करनेवालों का हुलिया और नाम बताने के बाद भी पुलिस को अपराधियों को गिरफ्तार करने में तकलिफ हो रही है। क्या पुलिस जांच प्रक्रिया का बहाना बनाकर इस किड्नैपिंग केस को दबाने की लक्ष्मण सारिपुत्र (व.पो.नि.) की यह कोई चाल है ? किड्नैपिंग करनेवाले अपराधियों के हाथों कहीं लक्ष्मण सारिपुत्र बिक तो नहीं गये ? केस दबाने के लिये अपना इमान बेचकर कितना घुस लेकर व.पो.नि. लक्ष्मण सारिपुत्र अपराधियों को बचा रहे है? ऐसे कई सवाल अब बदलापूर शहर में लोग पुछ रहे है।

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