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    कापूरबावडी में साईबर क्राईम की वारदात होती है और पुलिस रपट लिखती है 18 दिन बाद !

    -नौकरी का झांसा देकर सेक्युरिटी डिपॉजिट के नाम पर अकाऊंट से पैसे उडाये
    -स्थानिय पुलिस प्रशासन और साईबर क्राईम ठाणे इन अपराधियों पर कब पकडेगी?

    ठाणे (महाराष्ट्र विकास मिडिया)- आये दिन साईबर क्राईम की वारदातें भारत देश में बढती जा रही है। ऐसे में पुलिस प्रशासन सायबर क्राईम की वारदातों को अंजाम देनेवाले अपराधियों को पकडने के लिए सायबर क्राईम सेल तक हर शहर में शुरु किये है  लेकिन स्थानिय पुलिस प्रशासन शिकायकर्ता की कंम्प्लेंट ही वक्त रहते ना लेने से  आज भी साईबर क्राईम की वारदातें हररोज बढती जा रही है। हालही में कापूरबावडी पुलिस थाने के एक केस को देखकर हर किसी के मन में एक बात आएगी क्या सचमें सच में पुलिस प्रशासन गंभिरता से ऐसे मामलों की जांच करती है।
    3 अगस्त के दिन ठाणे ढोकाळी इलाके में रहनेवाली युवती को नोकरी डॉट कॉम के नाम से 9582235030 और 7428456920 से एक फोन आता है। उन्हे नौकरी का झासा देते हुए कँप जमिनी कंपनी में उन्हे नोकरी के लिए इटररव्यु के लिए भेजा जाएगा ऐसा कहा जाता है और सेक्युरिटी डिपॉझिट के तौर पर उनसे 2000 रुपयों की मांग की जाती है। फोन में बात करनेवाला ठग इतना मंजा हुआ होता है कि नौकरी का झांसा देते वक्त सामनेवाला कुछ सोच हीं नहीं पाता इस तरह की ट्रैक्टीस कर सेक्युरिटी डिपॉजिट के नाम पर बैंक डिटेल और डेबिट कार्ड नंबर सी.व्ही.व्ही. नंबर मांगता है। पैसों की मांग पर जब दर्शना कुलकर्णी ने पुछा कि वेबसाईट पर तो 'पैसे ना दें' ऐसा ही लिखा होता है फिर नोकरी के लिए पैसे क्यों लगेंगे इसपर सेक्योरिटी डिपोजिट एवं अन्य बातें बताकर यह पेमेंट पुरी तरह ऑनलाईन और सुरक्षित होता है ऐसा कहता है। उसके बाद उक्त महिला को ऑनलाईन लिंक भेजी जाती है लेकिन ट्रान्सैक्शन नहीं हो पाता ऐसे में फिर ठग डेबिट कार्ड डिटेल और सी.व्ही.व्ही. नंबर की मांग करते है। और ओ.टी.पी. की मांग करते हुए अकाऊंट का पुरा पैसा वाईपआऊट किया जाता है। ठिक इसी तरह दर्शना कुलकर्णी को भी फंसाया गया और उसके खाते से कुल 12 हजार रुपये उडाकर साईबर क्रिमीनल नौ दो ग्यारह हो गये है।


    दर्शना कुलकर्णी के खाते से पहले 2000 रुपये तीन बार डेबिट किया गया, इसपर जब युवती ने ठग से पुछताछ की तो टेक्निकल एरर का बहाना करते हुए फिर एक ओ.टी.पी. आएगा वह दे दिजीए जिसके बाद पैसे रिफंड किया जाएगा ऐसा कहकर और एक 6000 रुपये उसी अकाऊंट से डेबिट किया गया। इस प्रकार कुल 12 हजार रुपये ठगों ने कुछ ही मिनिटों में डेबिट कराते हुए नोकरी के नाम पर युवती का बैंक अकाऊंट ही वाईपआऊट कर दिया। इसके बाद वे साईबर क्राईम की शिकार हो चुकी है यह बात पता चलने पर पिडीत युवती ने कापुरबावडी पुलिस थाने में शिकायत करने का कदम उठाया। 
    अब यहां पर काबुरपावडी पुलिस थाना नागरिकों के प्रति कितनी गंभीर है यह देखने को मिलेगा?
    कापूरबावडी पुलिस थाने ने तो पहले शिकायतकर्ता को ही अपराधी के कटघेरे में खडे करने जैसी बातें कही। 'आपकी गलती है आपने ओ.टी.पी. क्यों दिया अब पैसा कटा तो पुलिस वापस करेंगे क्या पैसा हर रोज लाखो लोग फंसते है पुलिस क्या करें ऐसा कहते हुए शिकायत लेने से साफ मना कर दिया। पिडीत युवती ने विनती करने के बाद भी पुलिस ने 17 दिनों तक इस मामले की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की। आखिरकार जब युवती ठाणे पुलिस कमिश्नर कार्यालय में जाकर अपनी शिकायत देने पहुंची तब जाकर अठारवे दिन (दि. 22 अगस्त को) कापूरबावडी पुलिस थाने ने शिकायतकर्ता दर्शना अजित कुलकर्णी का स्टेटमेंट लेकर अंजान अपराधियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 धारा 420 और आई.टी. अॅक्ट धारा 66(सी) के तहत मामला दर्ज किया।
    दरअसल, इस मामले में इस वारदात के बाद भी कुछ दिनों तक उक्त ठगों के दोनों फोन नंबर (9582235030 , 7428456920) काम कर रहे थे। ऐसे में कापूरबावडी पुलिस थाने ने गंभिरतापूर्वक शिकायकर्ता की कंप्लेंट वारदात के दिन ही लेकर साईबर क्राईम विभाग में शिकायत फोरवर्ड करते हुए साथ ही ठगों के मोबाईल नंबर का  सी.डी.आर. निकालकर अपराधीयों को पकडना असंभव नहीं था, लेकिन कापूरबावडी पुलिस थाने को तो रिपट लिखाने में ही 18 दिन लगे यह पुलिस प्रशासन के काम करने के तरिके है ऐसा कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा।


    यह मामला सिर्फ दर्शना कुलकर्णी तक सिमित नहीं है आज ठाणे शहर में ही नहीं बल्कि कई मेट्रो सिटी और ग्रामिण इलाके में ठिक इसी तरह अपराधीयों द्वारा साईबर क्राईम की वारदातें धडल्ले से होती है, लेकिन हमारी पुलिस प्रशासन हाजिर कार्यवाही ना करनेसे आम जनता का काफी नुकसान होता है और साईबर क्रिमिनल नये नये शिकार आये दिन करते रहते है।
    दर्शना कुलकर्णी युवती एक मिसाल है जिन्होंने ऐसे ठगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के लिए पुलिस थाने में पुरी घटना की जानकारी देते हुए रपट लिखाई नहीं तो आज जगह जगह सैकडों लोग फंसते है जिनका हजार से लाख रुपये तक बैंक खाते से जाता है लेकिन पुलिसी प्रक्रिया को टालने के लिए पुलिस थाने में जाकर कोई कम्प्लेंट तक नहीं करता। लेकिन जिसप्रकार का व्यवहार कापूरबावडी पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा शिकायकर्ता से किया जाता है इसी वजह से शायद लोगों का पुलिस प्रशासन पर से विश्वास उठ गया है और लोग अन्याय के बावजूद थाने में रिपोर्ट तक नहीं करते।
    ठाणे पुलिस आयुक्त ने इस मामले की जांच के आदेश जल्द ही ठाणे साईबर क्राईम को देना चाहिए साथ ही इस मामले को दाखिल करने में 18 दिनों का समय लेनेवाले असंवेदनशील पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही करनी चाहिए ऐसी दैनिक महाराष्ट्र विकास मिडिया के कार्यकारी संपादक महेश कामत ने सी.पी. से मांग की है।


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