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    रिश्वतखोरी के लिए धारा 283 का गलत इस्तेमाल करते है बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के भ्रष्ट पुलिस?

    बदलापूर (महाराष्ट्र विकास मिडिया)- 200-500 के लिए खाकी वर्दी की बेईजती करानेवाले कई भ्रष्ट पुलिस अधिकारी एंटीकरप्शन ब्युरो के हत्थे चडे है जिसके बाद अब रिश्वतखोरी करते वक्त रिश्वतखोर पुलिसवाले अपने हाथ काले ना हो इसलिए कई नए नए पैंतरे आजमा रहे है। इसी तरह का पैंतरा हाल फिलहाल बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के कुछ रिश्वतखोर पुलिसवाले आजमा रहे है ऐसी शहर में चर्चा है।
    बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के रिश्वतखोर पुलिस हाल ही में धारा 283 का गलत इस्तेमाल कर लोगों और व्यापारीयों को तंग कर उनसे जबरन पैसे वसुलने का नया धंदा शुरु करने की शहर में चर्चा है। भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 283 के तहत पुलिस थाने हद्द में किसी भी सार्वजनिक जगह पर कोई वाहन खडा करता है, हाथगाडी लगाता है या फिर किसी भी प्रकार का अडचण का काम कर सार्वजनिक जगह पर लोगों को अडथळा निर्माण करने की कोशिश करता है जिससे लोगों के जान माल को धोका पहुंच सकता है ऐसे में ऐसे लोगों के खिलाफ, हाथगाडीवालों के खिलाफ या बाधा डालनेवाले व्यक्ति के खिलाफ स्थानिय पुलिस धारा 283 के तहत मामला दर्ज करती है। लेकिन इस धारा का गलत इस्तेमाल कर घूसखोरी भी की जा सकती है यह बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के हरकतों को देख समज आ रहा है।
    बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने हद्द में कई सार्वजनिक जगहों पर लोगों को आवागमन में बाधा निर्माण होगा इस प्रकार हाथगाडी, ठेला, स्टॉल, वाहन लगाया जाता है। लेकिन उस जगह पर बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के पुलिसकर्मी कभी भी धारा 283 के तहत कार्यवाही करते नजर नहीं आते। वे इन हाथगाडी वालों पर क्यों कारवाई नहीं करते इसकी जांच करने जब महाराष्ट्र विकास मिडिया ने ग्राऊंड रिपोर्ट लेना शुरु किया तब पता चला कि बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने को इन सभी हाथगाडी, ठेलेवालों से लेकर स्टॉलवाले मासिक हफ्ता (घूस) देते है। अब इसमें मजे की बात यह है कि जो गरिब हाथगाडीवाला या ड्रायव्हर, व्यापारी बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के भ्रष्ट पुलिस अधिकारीयों को रिश्वत नहीं देता फिर उस वक्त इन पुलिसकर्मीयों को धारा 283 की याद आती है।
    इसका जिता जागता उदाहरण हालही में दि. 14 अगस्त के दिन पुलिस कॉन्स्टेबल के.बी.पाटोळे अपने सहपुलिसकर्मी बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के उपनिरीक्षक गोपाळ, पुलिस हवलदार राठोड, पुलिस कॉन्स्टेबल एस. एन. माने शहर में पेट्रोलिंग कर रहे थे। उस वक्त उन्हे दोपहर के 14.35 बजे हिरापन्ना दुकान के सामने सार्वजनिक सढक पर सानेवाडी बदलापूर पश्चिम के सामने टेम्पो दिखी। बता दें कि यह टेम्पो किसी स्थानिय नागरिक या व्यापारी की नहीं बल्की रायगड जिला के खोपोली तालुका के सावरोली में रहनेवाले एक ड्रायव्हर की है। पुलिस कर्मीयों के हिसाब से वह टेम्पो सार्वजनिक सढक पर बाधा पहुंचाने जैसा साथ ही लोगों को धोकादायक होने जैसे स्थिती में पाया गया जिसके कारण धारा 283 के तहत उक्त टेम्पो के ड्रायव्हर पवनकुमार शिवप्रसाद यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया। नियमों के अनुसार की गई कार्यवाही का हम मिडिया के नाते बिलकुल भी विरोध नहीं करते है लेकिन इस मामले का ट्विस्ट तो अब आना है। पवनकुमार शिवप्रसाद यादव पर मामला दर्ज कराने के बाद उसे डरा धमकाकर खाकी वर्दी का धौस दिखाकर उससे जबरन फाईन के नाम पर 2 हजार रुपये वसुले है। उक्त ड्रायव्हर ने पुलिस कार्यवाही से परेशान होकर पैसे दिये है। यह बात खुद पिडीत (पुलिस के हिसाब से आरोपी) ने मिडिया को बताया है।
    इस तरह धारा 283 का गलत इस्तेमाल कर बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के रिश्वतखोर पुलिसकर्मी रिश्वतखोरी के चलते ऐसे कारनामे करते है। क्या ऐसे हरकतों का वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण सारिपुत्र को कुछ पता नहीं है ? या इन वसुली में सारिपुत्र का भी प्रोफिट शेअर होता है ? ऐसा शहर में चर्चा है।
    आज बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने हद्द में कई जगहों पर सार्वजनिक सढक पर लोगों को तकलिफ हो ऐसे तरिके से हाथगाडी से लेकर व्यापारी कई स्टॉल, गाडीयां लगाते है लेकिन उन लोगों पर बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने की पेट्रोलिंग करनेवाले पुलिसकर्मी कार्यवाही करते नजर नहीं आते। इन हाथगाडी वाले, ठेलेवालों से महिने का कितना हफ्ता पुलिस वालों को मिलता है जिससे इन हाथगाडी, ड्रायव्हर, व्यापारीयों पर धारा 283 लागु नही हो रहा इसका खुलासा व.पो.नि. लक्ष्मण सारिपुत्र ने करना चाहिए।
    इस मामले की सुर्खिया बनने की और एक वजह यह है कि एक ही टेम्पो पर कारवाई करते वक्त किस प्रकार दो एफआयआर बनाकर सरकार के आंख में भी झुल झोंकने का काम किया जाता है। पहला एफआयआर 170-19 जिसमें अपराधी का नाम गुडूकुमार बेसलाल राम लिखा है और कंटेन्ट में चालक का नाम पवनकुमार शिवप्रसाद यादव लिखा है और एक घंटो बात दुसरी एफआयआर बनती है। दुसरी एफआयआर 171-19 जिसमें अपराधी में पवनकुमार शिवप्रसाद यादव बताया जाता है। क्या इस प्रकार एक ही कार्यवाही दो अलग अलग कार्यवाही बताकर सरकार के आंखों में भी धुल झोंकने का बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने कर रही है? ऐसा सवाल अब बदलापूर शहर की जनता पुछ रही है।
    इस खबर के बाद भले ही वरिष्ठ स्तर पर पुलिस कमिश्नर, डी.सी.पी. एवं डिपार्टमेंट को बताने के लिए अब जाकर बदलापूर पश्चिम पुलिस तीन-चार कार्यवाही कर अपने आप को इमानदार साबित करने की बेतोड कोशिशे करेगी लेकिन धारा 283 का गलत इस्तेमाल कर रिश्वतखोरी जब तक भ्रष्ट पुलिस बंद नही करती तब तक नागरिकों के प्रति जो बदलापूर पश्चिम पुलिस थाने के रिश्वतखोर पुलिसकर्मीयों के प्रति क्रोध है वह कभी कम नहीं होगा।

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